हमारी पवित्र प्रार्थनाएं एवं आरतियां

Divine Prayers, Morning Aartis & Spiritual Wisdom Stotrams

10 Sacred Prayers
Morning Devotional Recitations
Mata Dhanpati Devi Trust
श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञानसार

अजन्मा है अमर आत्मा

प्रार्थना 1
अक्षर आकार:
यथा विनिस्त हो रहे हो, यथा उरकर रो रहे हो।
अजन्मा है अमर आत्मा, भय में जीवन खो रहे हो।।
जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा अच्छा ही है।
होग जो अच्छा ही होगा, यह नियम सच्चा ही है।।
पर भूलो हो कीज कल का, आज तुम क्यों हो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा...
हुई भूलों-भूलों का फिर, आज पश्चाताप क्यों?
कल क्या होगा? अनिश्चित है, आज फिर संताप क्यों?
भूट पड़ो कर्तव्य में तुम, बाट किसकी जो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा...
क्या गया तुम रो पड़े तुम लाये क्या थे खो दिया?
है हुआ क्या नृष्ट तुम्हारा, ऐसा क्या तुम्हारा था?
यथा ग्लानि से भरा मन, अंसुओं से धो रहे हो। अजन्मा है अमर आत्मा...
ले के खाली हाथ आए, जो लिया यहीं से लिया।
जो दिया नसीब से उसको, जो दिया यहीं कर दिया।।
जानकर वस्तूर जग का, क्यों परेशान हो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा...
जो तुम्हारा आज है, कल वो ही था किसी और का।
होग परसों जाने किसका, यह नियम संसार का।।
मन हो अपना समझना, दुःखों को संजो रहे हो। अजन्मा है अमर आत्मा...
जिसको तुम मृत्यु समझते, है वही जीवन तुम्हारा।
है नियम जग का बदलना, क्या पराया क्या तुम्हारा।।
एक क्षण में कंगाल हो, क्षण भर में मोह रहे हो। अजन्मा है अमर आत्मा...
मेरा-तेरा, बड़ा-छोटा, भेद ये मन से हटा दो।
सब तुम्हारे तुम सभी के, फासले मन से हटा दो।।
कितने जन्मों तक करोगे, पाप कर तुम जो रहे हो। अजन्मा है अमर आत्मा...
है किराये का मकान, ना तुम हो इसके ना तुम्हारा।
पंच तत्वों का बना घर, देह कुछ दिन का सहारा।
इस मकान में हो मुसाफिर, किस कदर यों खो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा...
उठो! अपने आपको, भगवान को अर्पित करो।
अपनी चिंता, शोक और भय, सब उसे अर्पित करो।
है वो ही उत्तम सहारा, क्यूं सहारा खो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा...
जब करो जो भी करो, अर्पण करो भगवान को।
सदा कर दो समर्पण, त्यागकर अभिमान को।
मुक्ति का आनंद अनुभव, सर्वदा क्यों खो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा...
नित्य प्रातः प्रार्थना

हे प्रभु! आनंददाता

प्रार्थना 2
अक्षर आकार:
हे प्रभु! आनंददाता !! ज्ञान हमको दीजिए।
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिए। हे प्रभु..............
लीजिये हमको शरण में हम सदाचारी बनें।
ब्रह्मचारी धर्मरक्षक वीर व्रतधारी बनें।। हे प्रभु..............
निंदा कभी भी हम किसी की भूलकर भी न करें।
ईर्ष्या कभी भी हम किसी की भूलकर भी न करें। हे प्रभु........
सत्य बोलें झूठ त्यागें मेल आपस में करें।
दिव्य जीवन हो हमारा यश तेरा गाया करें।। हे प्रभु............
जाये हमारा आयु हे प्रभु! लोक के उपकार में।
हाथ डाले हम कभी न भूलकर अपकार में।। हे प्रभु............
कीजिये हम पर कृपा ऐसी हे परमात्मा।
मोह मद मत्सर रहित होवे हमारी आत्मा।। हे प्रभु..............
प्रेम से हम गुरुजनों की नित्य सेवा किया करें।
प्रेम से हम संस्कृति की नित्य सेवा किया करें। हे प्रभु........
योगविद्या बद्धविद्या हो अधिक प्यारी हमें।
ब्रह्मनिष्ठा प्राप्त करके सहितकारी बनें।। हे प्रभु..............
संस्कार एवं मातृ-पितृ वंदना

बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे

प्रार्थना 3
अक्षर आकार:
बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे
ना उनको दिल से भुलाया करेंगे
माँ को ना दिल से भुलाया करेंगे
निकम्मा बना देंगी संगत बुरों की
भलो की ही संगत जमाया करेंगे
बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे............
बुरे बालकों में ना बैठे हम कभी भी
पास अपने न उनको लाया करेंगे
माँ को सदा सिर झुकाया करेंगे............
बुरी बात न हम सुनेंगे कभी किसी की
दूरा किसी को हम ना सुनाया करेंगे
माँ को ना दिल से भुलाया करेंगे............
फिरेंगे न गलियों में आवास बनकर
अकेले न गलों में जाया करेंगे
बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे............
चमक और दमक से न संबंध रखे हम
चलन न साहेगी का दिखाया करेंगे
बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे............
जगत के पिता से डरेंगे हमेशा
कभी ना किसी को सताया करेंगे
बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे............
राष्ट्र जागरण गीत

भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना

प्रार्थना 4
अक्षर आकार:
भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना
तुम्हे प्यार करे जग सारा तुम ऐसा बन दिखलाना
केवल इच्छा ना बढ़ाना, संयम जीवन में लाना
सादा जीवन तुम जीना, पर ताने रहना सीना
भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना...
जो लिखा है सदग्रन्थों में जो कुछ भी कहा है संतों ने
उसको जीवन में लाना वैसा ही बन दिखलाना
भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना...
तुम पुरुषार्थ तो करना, पर नेक राह पर चलना
सज्जन का संग ही करना, दुर्जन से बचकर रहना
भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना...
जीवन अनमोल मिला है, तुम मौके को मत खोना
यदि भटक गए इस जंग में जन्मो तक पड़ेगा रोना
भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना...
समर्पण एवं प्रेम प्रार्थना

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक

प्रार्थना 5
अक्षर आकार:
जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।
हमें मिलायें प्रेम बढ़ायें, नेक बने इनसान प्रभु।।
भेदभाव सब मिटे हमारा, सबको मन से प्यार करें।
जाये नजर जिस ओर हमारी, तेरा ही दीदार करें।।
पल-पल हँसते-गाते हमेशा, तेरा ही गुणगान प्रभु।
जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।
दुःख में कभी दुःखी ना होवें, सुख में न सुख ही चाह न हो।
जीवन के इस कठिन सफर में, कांटों की परवाह न हो।।
रोक सके ना कदम हमारे, विघ्नों के तूफान प्रभु।
जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।
दीन दुःखी और रोगी सबको, पोंछ के आँसू रोते नैना, हँसने पर मजबूर करें।।
संस्कृति की सेवा करते, निकले तन से प्राण प्रभु।
जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।
गुरु-ज्ञान से इस दुनिया का, दूर अंधेरा कर दें हम।
सत्य प्रेम के मीठे रस से, सबको जीवन भर दें हम।।
वीर धीर बन जीना सीखें, ये तेरी संतान प्रभु।
जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।
ईश्वरीय विश्वास एवं संतोष

हमसे प्रभु जी दूर नहीं है

प्रार्थना 6
अक्षर आकार:
हमसे प्रभु जी दूर नहीं है ना हम उनसे दूर हैं,
जैसा चाहे वैसे रखें हमको तो मंजूर है।
उसने हमको जन्म दिया है वो ही हमको पालेगा।
हर हालत में हमको तो बस वो ही आन सम्भालेगा।
उसका है ये सारा सृष्टि सब में उसका नूर है।
हमसे प्रभु जी दूर नहीं है...
एक भरोसा उसपे करके उसको ही अपना मान लें।
मिथ्या है संसार ये सोच भेद से मन में जान लें।
उसकी पूजा उसकी भक्ति करनी हमें जरूर है।
हमसे प्रभु जी दूर नहीं है...
किसमें है कल्याण हमारा ये तो वो ही जाने है।
धूप छांव और दुःख दर्द हमारे ये तो वो ही जाने है।
देगा दृष्टि उस परमपिता की हमसब पे भरपूर है।
हमसे प्रभु जी दूर नहीं है...
जो भी दे प्रसाद समझ के प्रेम से हमको लेना है।
बंगला दे या दे दे झोपड़ी रहकर हमें दिखाना है।
देता सबको यथा योग्य है यह उसका दस्तूर है।
हमसे प्रभु जी दूर नहीं है...
ज्ञान एवं सद्बुद्धि प्रार्थना

है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो

प्रार्थना 7
अक्षर आकार:
है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो
करुणा की धार छोड़ करुणा निधान दे दो
अपनी मदद हमेशा खुद आप कर सके हम
अपने जीवन की उलझनों को खुद सुलझा सके हम
इन बाजुओं में शक्ति है शक्तिमान दे दो
है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो...
दाता तुम्हारे दर पे किस चीज की कमी है
सद्बुद्धि और विद्या का दान दे दो
अगर चाहो तो चित्त को सद्गुण की खान दे दो
है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो...
ईश्वर तुम्ही हो सबकी बिगड़ी बनाने वाले
हम तो गलतियों के पुतले हमको तो माफ कर दो
अपनी इच्छाओं को कम कर सके हम वैसा ज्ञान दे दो
है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो...
डर है पथिक तुम्हारा कहीं रास्ता न भूल जाना
अच्छी संगतों में हमको भी स्थान दे दो
सेवा जो सबकी कर सके हम वैसा ही ज्ञान दे दो
है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो...
वैदिक जन्मदिवस मंगल पाठ

जन्मदिवस पर हम देते है तुमको बधाई

प्रार्थना 8
अक्षर आकार:
मंगलमय दीप जलाओ, प्रकाश जग में फैलाओ।
उज्ज्वल पुरुषार्थ जगाकर, आत्मपद अपना पाओ।।
चिरंजीव रहो तुम, शुभ घड़ी आज आई।
बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई।।
सद्गुण की खान बने तू, इतना महान बने तू।
हर कोई चाहे तुमको, ऐसा इंसान बने तू।।
तुझ पर गर्व करे सारा जमाना, शुभ घड़ी है आज आई।
बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई।।
ऋषियों का वंशज है तू, ईश्वर का अंशज है तू।
तुझमें है चंदा और तारे, तुझमें ही सर्जनहारे।।
तू जान ले पहचान ले, ईश्वर हो सुखदाई।
बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई।।
आनंदमय जीवन हो तेरा, खुशियों का हो सवेरा।
चमके तू बनके सूर्य, हर पल हो दूर अंधेरा।।
ज्ञान का भंडार हो तू, ईश्वर की संतान है तू।
बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई।।
परमेश्वर है तेरा अपना, निष्ठा तू ऐसी रखना।
गम की धूप लगे ना तुझको, देते है तुझको बधाई।
बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई।।
गुरु वंदना एवं कृतज्ञता

माता-पिता गुरु प्रभु चरणों में

प्रार्थना 9
अक्षर आकार:
माता-पिता गुरु प्रभु चरणों में दण्डवत बारम्बार।
हम पर किया बड़ा उपकार, हम पर किया बड़ा उपकार।।
माता ने जो कष्ट उठाया, वह ऋण कभी ना जाए चुकाया।
अंगुली पकड़कर चलना सिखाया, ममता की दी शीतल छाया।
जिनकी गोदी में पलकर हम कहलाते होशियार।
हम पर किया बड़ा उपकार.....
पिता ने हमको योग्य बनाया, कमा-कमा कर अन्न खिलाया।
पढ़ा-लिखा गुणवान बनाया, जीवन पथ पर चलना सिखाया।
जोड़-जोड़ अपनी संपत्ति का बना दिया हकदार।
हम पर किया बड़ा उपकार.....
तत्वज्ञान दृष्टि ने दर्शाया, अहंकार सब दूर हटाया।
हृदय में भक्ति दीप जलाकर, हरि दर्शन का मार्ग बताया।
बिना स्वार्थ ही कृपा करे ये गुरुजन हैं कितना महान।
हम पर किया बड़ा उपकार.....
प्रभु कृपा से नर तन पाया, सत्संग का साज सजाया।
बल, बुद्धि और विद्या देकर, सब जीवों में श्रेष्ठ बनाया।
जो भी प्रभु की शरण में आता, हो जाता उद्धार।
हम पर किया बड़ा उपकार.....
ईश्वर इच्छा सर्वोपरि

तेरे फूलों से भी प्यार तेरे कांटों से भी प्यार

प्रार्थना 10
अक्षर आकार:
तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे कांटों से भी प्यार।
जो भी देना चाहे दे दे करतार, ओ दुनिया के तारणहार।।
हमको दोनों है पसंद तेरी धूप और छांव।
दाता किसी भी दिशा में ले चल जिन्दगी की नाव।।
चाहे हमें लगा दे पार चाहे छोड़ मझधार।
जो भी देना चाहे दे दे करतार, ओ दुनिया के तारणहार.....
चाहे सुख दो या दुःख, चाहे खुशी दो या गम।
मालिक जैसे भी रखेंगे, रह लेंगे हम।।
चाहे कांटों के हार चाहे हरा-भरा संसार।
जो भी देना चाहे दे दे करतार, ओ दुनिया के तारणहार.....
संस्कार एवं नैतिक शिक्षा

माता धनपति देवी चैरिटेबल ट्रस्ट बच्चों को विद्या के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, गुरु वंदना और आध्यात्मिक विचारों से समृद्ध बनाता है।

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