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|| हरि ओउम् ||

Mata Dhanpati Devi Charitable Trust

NGO No. - HR/2017/0119039 | Regd. No. 690 Dt. 23-1-2006
Email: mddct2006@gmail.com | Website: www.matadhanpatidevi.com
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Founder
Office : New Building, Shant Nagar, Near Jangra School, Kath Mandi, Rohtak-124001 (Haryana)

हमारी प्रार्थनाएं और आरतियां

Our Prayers & Aartis

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अजन्मा है अमर आत्मा

यथं विनिस्त हो रहे हो, यथं उरकर रो रहे हो। अजन्मा है अमर आत्मा, भय में जीवन खो रहे हो।।

जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा अच्छा ही है। होगा जो अच्छा ही होगा, यह नियम सच्चा ही है।।

पर भूलो हो कीज कल का, आज तुम क्यों हो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा.........................

हुई भूलों-भूलों का फिर, आज पश्चाताप क्यों? कल क्या होगा? अनिश्चित है, आज फिर संताप क्यों?

भूट पड़ो कर्तव्य में तुम, बाट किसकी जो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा.........................

क्या गया तुम रो पड़े तुम लाये क्या थे खो दिया? है हुआ क्या नृष्ट तुम्हरे, ऐसा क्या तुम्हारा था।

यथं ग्लानि से भरा मन, अंसुओं से थो रहे हो।। अजन्मा है अमर आत्मा.........................

ले के खाली हाथ आए, जो लिया यहीं से लिया। जो दिया नसीब से उसको, जो दिया यहीं कर दिया।।

जानकर वस्तूर जग का, क्यों परेशान हो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा.........................

जो तुम्हारा आज है, कल वो ही था किसी और का। होगा परसों जाने किसका, यह नियम संसार का।।

मन हो अपना समझना, दुःखों को संजो रहे हो।। अजन्मा है अमर आत्मा.........................

जिसको तुम्ह मृत्यु समझते, है वही जीवन तुम्हारा। है नियम जग का बदलना, क्या पराया क्या तुम्हारा।।

एक क्षण में कंगाल हो, क्षण भर में मोह रहे हो।। अजन्मा है अमर आत्मा.........................

मैस-तेरा, बड़ा-छोटा, भेद ये मन से हटा दो। सब तम्हारे तुम सभी के, फासले मन से हटा दो।।

कितने जन्मों तक करोगे, पाप कर तुम जो रहे हो।। अजन्मा है अमर आत्मा.........................

है किराये का मकान, ना तुम हो इसके ना तुम्हारा। पंच तत्वों का बना घर, देह कुछ दिन का सहारा।

इस मकान में हो मुसाफिर, किस कदर यों खो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा.........................

उठो! अपने आपको, भगवान को अर्पित करो। अपनी चिंता, शोक और भय, सब उसे अर्पित करो।

है वो ही उत्तम सहारा, क्यूं सहारा खो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा.........................

जब करो जो भी करो, अर्पण करो भगवान को। सदा कर दो समर्पण, त्यागकर अभिमान को।

मुक्ति का आनंद अनुभव, सर्वदा क्यों खो रहे हो? अजन्मा है अमर आत्मा.........................

हे प्रभु! आनंददाता

हे प्रभु! आनंददाता !! ज्ञान हमको सीजिये।

शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिए। हे प्रभु..............

लीजिये हमको शरण में हम सदाचारी बनें।

ब्रह्मचारी धर्मरक्षक वीर व्रतधारी बनें।। हे प्रभु..............

निंदा कभी भी हम किसी की भूलकर भी न करें।

ईर्ष्या कभी भी हम किसी की भूलकर भी न करें। हे प्रभु........

सत्य बोलें झूठ त्यागें मेल आपस में करें।

दिव्य जीवन हो हमारा यश तेरा गाया करें।। हे प्रभु............

जाये हमारा आयु हे प्रभु! लोक के उपकार में।

हाथ डाले हम कभी न भूलकर अपकार में।। हे प्रभु............

कीजिये हम पर कृपा ऐसी हे परमात्मा।

मोह मद मत्सर रहित होवे हमारी आत्मा।। हे प्रभु..............

प्रेम से हम गुरुजनों की नित्य सेवा किया करें।

प्रेम से हम संस्कृति की नित्य सेवा किया करें। हे प्रभु........

योगविद्या बद्धविद्या हो अधिक प्यारी हमें।

ब्रह्मनिष्ठा प्राप्त करके सहितकारी बनें।। हे प्रभु..............

बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे

बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे

ना उनको दिल से भुलाया करेंगे

माँ को ना दिल से भुलाया करेंगे

निकम्मा बना देंगी संगत बुरों की

भलो की ही संगत जमाया करेंगे

बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे............

बुरे बालकों में ना बैठे हम कभी भी

पास अपने न उनको लाया करेंगे

माँ को सदा सिर झुकाया करेंगे............

बुरी बात न हम सुनेंगे कभी किसी की

दूरा किसी को हम ना सुनाया करेंगे

माँ को ना दिल से भुलाया करेंगे............

फिरेंगे न गलियों में आवास बनकर

अकेले न गलों में जाया करेंगे

बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे............

चमक और दमक से न संबंध रखे हम

चलन न साहेगी का दिखाया करेंगे

बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे............

जगत के पिता से डरेंगे हमेशा

कभी ना किसी को सताया करेंगे

बड़ो को सदा सिर झुकाया करेंगे............

भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना

भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना

तुम्हे प्यार करे जग सारा तुम ऐसा बन दिखलाना

केवल इच्छा ना बढ़ाना, संयम जीवन में लालना

सादा जीवन तुम जीना, पर ताने रहना सीना

भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना

तुम्हे प्यार करे जग सारा तुम ऐसा बन दिखलाना

जो लिखा है सदग्रन्थों में जो कुछ भी कहा है संतों ने

उसको जीवन में लाना वैसा ही बन दिखलाना

भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना

तुम्हे प्यार करे जग सारा तुम ऐसा बन दिखलाना

तुम पुरुषार्थ तो करना, पर नक रहा पर चलना

सज्जन का संग ही करना, दुर्जन से बचकर रहना

भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना

तुम्हे प्यार करे जग सारा तुम ऐसा बन दिखलाना

जीवन अनमोल मिला है, तुम मौके को मत खोना

यदि मटक गए इस जंग में जन्मो तक पड़ेगा रोना

भारत के नौजवानो भारत को दिव्य बनाना

तुम्हे प्यार करे जग सारा तुम ऐसा बन दिखलाना

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक.....

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।

हमें मिलायें प्रेम बढ़ायें, नेक बने इनसान प्रभु।।

भेदभाव सब मिटे हमारा, सबको मन से प्यार करें।

जाये नजर जिस ओर हमारी, तेरा ही दीदार करें।।

पल-पल हाण-हाण करे हमेशा, तेरा ही गुणगान प्रभु।

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।

दुःख में कभी दुःखी ना होवें, सुख में न सुख ही चाह न हो।

जीवन के इस कठिन सफर में, कोटी की परवाह न हो।।

रोक सके ना फीर हमारे, विघ्नों के तूफान प्रभु।

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।

दीन दुःखों और रोगी सबको, पोंछ के आँसू रोते नैना, हँसने पर भजवार करें।।

संस्कृति की सेवा करते, निकले तन से प्राण प्रभु।

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।

गुरु-ज्ञान से इस दुनिया का, दूर अंधेरा कर दें हम।

सत्य प्रेम के मीठे रस से, सबको जीवन भर दें हम।।

वीर धीर बन जीना रीझे, ये तेरी संतान प्रभु।

जोड़ के हाथ झुका के मस्तक, माँगे ये वरदान प्रभु।।

हमसे प्रभु जी दूर नहीं है ना हम उनसे दूर है....

हमसे प्रभु जी दूर नहीं है ना हम उनसे दूर है,

जैसा चाहे वैसे रखें हमको तो मंजूर है।

उसने हमको जन्म दिया है वो ही हमको पालेगा

हर हालत में हमको तो बस वो ही आन सम्भालेगा

उसका है ये सारा सृष्टि सब में उसका नूर है।

हमसे प्रभु जी दूर नहीं है........

एक भरोसा उसपे करके उसको ही अपना मान ले

मिथ्या है संसार ये सोच भेद से मन में जान ले

उसकी पूजा उसकी भक्ति करनी हमें जरूर है।

हमसे प्रभु जी दूर नहीं है........

किसमें है कल्याण हमारा ये तो वो ही जाने है

धूप छांव और दुःख दर्द हमारे ये तो वो ही जाने है

देगा दृष्टि उस परमपिता की हमसब ये भरपूर है।

हमसे प्रभु जी दूर नहीं है........

जो भी दे प्रसाद समझ के प्रेम से हमको लेना है

बुगला दे या दे दे झोपड़ी रहकर हमें दिखाना है

देता सबको यथा योग्य है यह उसका दस्तूर है।

हमसे प्रभु जी दूर नहीं है........

है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो...

है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो

करुणा की यार छोड़े करुणा निदान दे दो

अपनी मदद हमेशा खुद आप कर सके हम

अपने जीवन की उलझनों को खुद सुलझा सके हम

इन बाजुओं में शक्ति है शक्तिमान दे दो

है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो.....

दाता तुम्हारे दर पे किस बिज की कमी है

पड़ा धूलवंश और बुद्धि का दान दे दो

अगर चाहो तो चिन्हों को दौलत को खान दे दो

है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो.....

ईश्वर तुम्ही हो सबकी बिगड़ी बनाने वाले

हम तो गलतों के पुतले हमको तो माफ कर दो

अपनी इच्छाओं को कम कर सके हम वैसा हो ज्ञान दे दो

है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो.....

डर है पथिक तुम्हारा कहीं रास्ता न भूल जाना

अच्छरी संगतों में हमको भी ज्ञान दे दो

सेवा जो दुस्त की कर सके हम वैसा ही ज्ञान दे दो

है ज्ञानवान भगवान हमको भी ज्ञान दे दो.....

जन्मदिवस पर हम देते है तुमको बधाई

मंगलमयदीप जलाओं, जलजाया जग में फैलाओ

उज्ज्म पुरुषार्थ जगाकर, आत्मपद अपना पाओ

चिरंजिव रहो तुम, शुभ घड़ी आज आई

बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई

सद्गुण की खान बने तू, इतना महान बने तू

हर कोई चाहे तुमको, ऐसे इन्सान बने तू

तुझ पर गर्व करे सारा जमाना, शुभ घड़ी है आज आई

बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई

ऋषियों का वंशज है तू, ईश्वर का अंशज है तू

तुझमें है चन्दा और तारे, तुझमें ही सर्जन हारे

तू जाने ले पहचान ले, ईश्वर हो सुखदाई

बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई

आनन्दमय जीवन हो तेरा, खुशियों का हो सवेरा

चमके तू बनके सुरेख, हर पल हो दूर अंधेरा

ज्ञान का भंडार हो तू, ईश्वर की संतान है तू

बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई

प्रगेश्वर है तेरा अपना, निष्ठा तू ऐसी रखना

गम की धूप लगे ना तुझको देते है तुझको बधाई

बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई

माता-पिता गुरु प्रभु चरणों में उठवत बारम्बार

हम पर किया बड़ा उपकार, हम पर किया बड़ा उपकार

माता ने जो कष्ट उठाया, वह ऋण कभी ना जाए चुकाया

अंगुली पकड़कर चलना सिखाया, ममता की दी शीतल छाया

जिनको गोदी में पलकर हम कहलाते होशियार

हम पर किया बड़ा उपकार.....

पिता ने हमको योग्य बनाया, कर्मा कर्मा कर अन्न खिलाया

पढ़ा लिखा गुणवान बनाया जीवन पथ पर चलना सिखाया

जोड़-जोड़ अपनी संपत्ति का बना दिया हमकदार

हम पर किया बड़ा उपकार.....

तत्वज्ञान दृष्ट ने दर्शाया, अहंकार सब दूर हटाया

हृदय में भक्ति दीप जलाकर, हरि दर्शन का मार्ग बताया

बिना स्वार्थ ही कृपा करे ये दुस्त है कितना महान

हम पर किया बड़ा उपकार.....

प्रभु कृपा से नर तन पाया, सत मिलन का साज सजाया

बेल, बुद्धि और विद्या देकर, सब जीवों में मोक्ष बनाया

जो भी दुस्त की शरण में आता हो जाता उद्धार

हम पर किया बड़ा उपकार.....

तेरे फूलों से भी प्यार तेरे कांटों से भी प्यार

जो भी देना चाहे दे दे करतार, ओ दुनिया के तारण हार

हमको दोनों है पसंद तेरी धूप और छाव

दाता किसी भी दिशा में ले चल जिन्दगी की नाव

चाहे हमें लगा दे पार चाहे छोड़ मझधार

जो भी देना चाहे दे दे करतार, ओ दुनिया के तारण हार.....

चाहे सुख दो या दुःख, चाहे खुशी दो या गम

मालिक जैसे भी रखेंगे, रह लेंगे हम

चाहें कांटों के हार चाहे हरा भरा संसार

जो भी देना चाहे दे दे करतार, ओ दुनिया के तारण हार.....